देहरादून, उत्तराखंड | 11 जुलाई 2026
बदरीनाथ धाम में दान चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। मामले में कार्रवाई के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में पूर्व में हुई नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर सवाल उठाए हैं, जबकि गोदियाल ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताते हुए तीखा पलटवार किया है।
भाजपा ने नियुक्तियों को लेकर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में दान चढ़ावा चोरी प्रकरण में जिस वैयक्तिक सहायक को निलंबित किया गया है, उसे वर्ष 2014 में उस समय स्थायी किया गया था, जब गणेश गोदियाल बीकेटीसी के अध्यक्ष थे।
उन्होंने कहा कि चूंकि संबंधित कर्मचारी को स्थायी नियुक्ति गोदियाल के कार्यकाल में मिली थी, इसलिए इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी बनती है।
“गोदियाल को माफी मांगनी चाहिए” : विनोद चमोली
विनोद चमोली ने कहा कि सरकार धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और पवित्रता को लेकर गंभीर है और इसी कारण मामले में तत्काल कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच होती है तो बीकेटीसी के पूर्व कार्यकालों की भी समीक्षा की जाएगी। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों की जांच होना स्वाभाविक है। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को इस मामले पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
गणेश गोदियाल ने आरोपों को बताया निराधार
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और नीति के अनुसार अपनाई गई थी।
गोदियाल ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को व्यक्तिगत पसंद या पक्षपात के आधार पर स्थायी नहीं किया गया था, बल्कि वर्षों से समिति में कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाकर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
“किसी कर्मचारी के बाद के कृत्य की जिम्मेदारी नियुक्ति करने वाले पर नहीं”
गणेश गोदियाल ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी द्वारा वर्षों बाद यदि कोई कथित अनियमितता की जाती है तो उसके लिए उस समय नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने वाले व्यक्ति को दोषी ठहराना तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति के समय कर्मचारी की पात्रता, सेवा अवधि और निर्धारित नियमों के आधार पर ही निर्णय लिया गया था और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई थी।
भाजपा पर साधा निशाना
भाजपा प्रवक्ता के बयान पर पलटवार करते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि इस प्रकार का तर्क पूरी तरह हास्यास्पद है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के वर्षों बाद किए गए कथित अपराध के लिए नियुक्ति करने वाले को जिम्मेदार माना जाए, तो उसी तर्क से किसी भी व्यक्ति के भविष्य के कृत्यों के लिए उसके परिवार को भी दोषी ठहराया जा सकता है, जो पूरी तरह अनुचित और अव्यावहारिक सोच है।
दान चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी
उल्लेखनीय है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में दान चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के मामले में समिति के एक कर्मचारी को निलंबित किया जा चुका है। प्रकरण की विभागीय जांच जारी है और संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
बदरीनाथ दान चढ़ावा चोरी का मामला अब प्रशासनिक जांच के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। भाजपा जहां नियुक्तियों को लेकर पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल की जवाबदेही तय करने की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताते हुए नियमों के तहत हुई नियुक्तियों का बचाव कर रही है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।


