देहरादून, 24 जून 2026
उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी संस्थानों, नगर निकायों और धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिलने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और धार्मिक वातावरण को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कानून को हाथ में लेने वाले तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
23 जून को प्रदेश के कई संस्थानों और धार्मिक स्थलों को भेजे गए धमकी भरे ईमेलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था। हालांकि जांच और तलाशी अभियान के दौरान किसी भी स्थान पर कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार को प्राप्त सभी धमकियों को बेहद गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागों, पुलिस और जांच एजेंसियों को मामले की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति हो या संगठन, यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए पूरे देश में जाना जाता है। ऐसे में प्रदेश के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राज्य में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाए रखना है।
जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में मसूरी नगर पालिका, हरिद्वार नगर निगम और कुछ अन्य संस्थानों को भी इसी प्रकार के धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए थे। इन ईमेलों में हरिद्वार, ऋषिकेश, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का उल्लेख किया गया था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई।
सूत्रों के मुताबिक कई ईमेल पंजाबी भाषा में लिखे गए थे। जांच एजेंसियों को इनमें कुछ ऐसे संदर्भ भी मिले हैं, जिनकी विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है। साइबर विशेषज्ञ ईमेल के स्रोत, सर्वर लोकेशन और तकनीकी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन संदेशों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय हैं।
धमकी भरे संदेशों के बाद राज्य पुलिस, खुफिया विभाग और साइबर सेल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील धार्मिक स्थलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान प्रदेश में लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने सभी संबंधित विभागों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यात्रा मार्गों, प्रमुख पड़ावों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा या भय का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड सभी धर्मों, समुदायों और संस्कृतियों का सम्मान करने वाला राज्य है। यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु और पर्यटक की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या समूह जानबूझकर अफवाह फैलाने, भय का माहौल बनाने या धार्मिक सौहार्द को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतेगी और पूरे मामले की लगातार निगरानी की जा रही है।
निष्कर्ष
धमकी भरे ईमेलों की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क जरूर किया है, लेकिन राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड की सुरक्षा, शांति और धार्मिक सौहार्द के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जांच एजेंसियां ईमेल भेजने वालों तक पहुंचने के लिए तकनीकी और साइबर स्तर पर गहन पड़ताल कर रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री के सख्त संदेश से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में भय और अस्थिरता फैलाने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा।


