देहरादून, 24 जून 2026
उत्तराखंड पुलिस की छवि धूमिल करने और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से एक युवक ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पुलिस महकमे को भी सतर्क कर दिया। ‘उत्तराखंड पुलिस 112’ के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का एआई तकनीक से तैयार किया गया डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले आरोपी को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 20 वर्षीय लुकमान मलिक, निवासी मोरोवाला, क्लेमेंटटाउन, देहरादून के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि आरोपी पुलिस विभाग में भर्ती होना चाहता था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में सफल नहीं हो पाया। इसी असफलता के बाद उसने पुलिस की वर्दी और पहचान का गलत इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाने की योजना तैयार की।
एसटीएफ की पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक का उपयोग कर उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का डांसिंग वीडियो तैयार किया और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया। इसके अलावा उसने पुलिस विभाग के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट संचालित किया, जिससे लोगों को भ्रमित किया जा सके।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने एआई तकनीक की मदद से स्वयं की कई तस्वीरें पुलिस वर्दी में तैयार की थीं। इतना ही नहीं, उसने उत्तराखंड पुलिस का एक फर्जी पहचान पत्र भी बना लिया था। हालांकि अब तक की जांच में इस पहचान पत्र का किसी अन्य अवैध गतिविधि में इस्तेमाल होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब 20 जून को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की सोशल मीडिया प्रभारी भावना कर्णवाल ने फर्जी सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस और एसटीएफ ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।
पुलिस टीम ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया। डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर जांच टीम आरोपी तक पहुंची और उसे क्लेमेंटटाउन क्षेत्र से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया, जिसमें ‘उत्तराखंड पुलिस 112’ नाम का फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट लॉग-इन अवस्था में मिला। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में एआई जनरेटेड वीडियो, पुलिस वर्दी में तैयार की गई तस्वीरें तथा फर्जी पुलिस पहचान पत्र की डिजिटल प्रतियां भी बरामद हुईं।
इसके अतिरिक्त आरोपी के घर से उत्तराखंड पुलिस की वर्दी जैसी दिखने वाली पोशाक और अन्य संबंधित सामग्री भी बरामद की गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर प्रभाव जमाने, अधिक फॉलोअर्स प्राप्त करने तथा भविष्य में आर्थिक लाभ कमाने की मंशा से इस प्रकार की गतिविधियां संचालित कर रहा था।
एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ फर्जी पहचान पत्र तैयार करने, सरकारी विभाग के नाम का दुरुपयोग करने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने तथा एआई तकनीक के माध्यम से भ्रामक सामग्री प्रसारित करने सहित विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की है। बरामद सभी सामग्री को नियमानुसार सीज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और भौतिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
निष्कर्ष
यह मामला आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की चाह में फर्जी पहचान और एआई आधारित भ्रामक सामग्री तैयार करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे सरकारी संस्थाओं की साख पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले ऐसे भ्रामक और फर्जी कंटेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


