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चारधाम यात्रियों को निशाना बना रहा साइबर गिरोह: बिहार से संचालित फर्जी हेली बुकिंग रैकेट का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार

स्थान : देहरादून, उत्तराखंड
तारीख : 30 मई 2026

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का फायदा उठाकर साइबर अपराधी नए-नए तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऐसे ही एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो हेली सेवा बुकिंग के नाम पर देशभर के श्रद्धालुओं को निशाना बना रहा था। इस मामले में बिहार के नालंदा जिले से गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से संचालित हो रहा था और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को फर्जी हेलीकॉप्टर टिकट, वीआईपी दर्शन और तत्काल बुकिंग का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी।


सोशल मीडिया के जरिए रचा जा रहा था ठगी का जाल

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के अनुसार गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट का इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी फर्जी फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट, व्हाट्सएप नंबर और नकली वेबसाइट तैयार कर खुद को अधिकृत हेलीकॉप्टर सेवा एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते थे।

चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं की भारी मांग का फायदा उठाते हुए यात्रियों को सीमित सीट उपलब्ध होने, तत्काल टिकट मिलने और वीआईपी दर्शन जैसी सुविधाओं का लालच दिया जाता था। श्रद्धालु जब इन झूठे दावों पर भरोसा कर ऑनलाइन भुगतान कर देते थे, तब उन्हें नकली टिकट भेज दिए जाते थे।


म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम सीधे अपने खातों में नहीं मंगाता था। इसके लिए विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें साइबर अपराध की भाषा में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

श्रद्धालुओं से प्राप्त धनराशि इन खातों में जमा कराई जाती थी, जिसके बाद एटीएम और अन्य माध्यमों से रकम निकाल ली जाती थी। प्राप्त धन को गिरोह के विभिन्न सदस्यों के बीच बांटा जाता था और खाते उपलब्ध कराने वालों को 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।


नाबालिगों को बनाया जा रहा था साइबर नेटवर्क का हिस्सा

एसटीएफ की जांच में एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया है। बिहार में जांच के दौरान कुछ नाबालिगों से भी पूछताछ की गई, जिससे संकेत मिले कि साइबर अपराधी किशोरों और नाबालिगों को भी अपने नेटवर्क का हिस्सा बना रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में नाबालिगों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों का उपयोग साइबर अपराध को अंजाम देने में किया जाता है। इससे अपराधियों को अपनी वास्तविक पहचान छिपाने में मदद मिलती है।


पहचान छिपाने के लिए अपनाते थे विशेष तरीके

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक गिरोह के सदस्य अपनी लोकेशन और पहचान छिपाने के लिए तकनीकी तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में पता चला है कि कई बार आरोपी अनजान लोगों के मोबाइल हॉटस्पॉट और इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करते थे ताकि साइबर जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक गतिविधियों तक आसानी से न पहुंच सकें।

इस तकनीक के कारण जांच को और अधिक जटिल बनाने की कोशिश की जाती थी।


बिहार से गिरफ्तार हुए दो मुख्य आरोपी

एसटीएफ ने इस मामले में बिहार के नालंदा जिले से दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक कुमार निवासी शेरपुर, बिहार शरीफ तथा विजित कुमार उर्फ मिकी निवासी शेखपुरा, बिहार के रूप में हुई है।

आरोपियों के कब्जे से पांच बैंक पासबुक, एक चेकबुक, दो मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।


एक और आरोपी की भूमिका आई सामने

जांच के दौरान गृह मंत्रालय के आई4सी (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और बिहार पुलिस से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर एक अन्य आरोपी का नाम भी सामने आया है।

एसटीएफ के अनुसार नालंदा निवासी शिव कुमार पासवान उर्फ फुलटून की भूमिका भी इस साइबर नेटवर्क में संदिग्ध पाई गई है। वह पहले से बिहार में दर्ज एक साइबर धोखाधड़ी के मामले में आरोपी है। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसके उत्तराखंड में संचालित हेली सेवा धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

एसटीएफ ने उसके खिलाफ बी-वारंट प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।


चारधाम यात्रियों को जारी की गई चेतावनी

एसटीएफ ने चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि हेलीकॉप्टर टिकट, होटल बुकिंग या वीआईपी दर्शन जैसी सेवाओं के लिए केवल अधिकृत और सरकारी पोर्टलों का ही उपयोग करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले विज्ञापनों, अनजान वेबसाइटों और व्हाट्सएप नंबरों के माध्यम से किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन कर लें।

अधिकारियों का कहना है कि यात्रा सीजन के दौरान साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं और श्रद्धालुओं की जल्दबाजी का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।


निष्कर्ष

चारधाम यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ साइबर अपराधियों ने भी श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बिहार से संचालित इस संगठित साइबर गिरोह का खुलासा सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं। ऐसे में यात्रियों को सतर्क रहकर केवल अधिकृत माध्यमों से ही बुकिंग करनी चाहिए, ताकि धार्मिक यात्रा किसी साइबर ठगी का शिकार न बने।

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