देहरादून / पिथौरागढ़ | 30 जून 2026
उत्तराखंड कांग्रेस में पिथौरागढ़ में आयोजित ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ के दौरान सामने आई गुटबाजी और मंच पर हुई अनुशासनहीनता को लेकर पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कार्यक्रम के दौरान हुई घटनाओं को गंभीर मानते हुए तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही पिथौरागढ़ जिला महिला कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
पार्टी ने संबंधित नेताओं से तीन दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले को अनुशासन समिति के समक्ष भी भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मंच पर हुई घटना के बाद पार्टी ने दिखाई सख्ती
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसार, पिथौरागढ़ में आयोजित परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी के दौरान मंच पर ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिन्हें पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत माना।
प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेता महेंद्र सिंह लुंठी, दीपक तथा जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना नगरकोटी द्वारा मंच से किए गए व्यवहार को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है। इसी आधार पर तीनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
“मंच पर इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं”
प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि यदि किसी नेता को अपनी बात रखनी थी तो उसके लिए पार्टी के भीतर निर्धारित मंच उपलब्ध थे। सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष की उपस्थिति में इस प्रकार का व्यवहार संगठन की गरिमा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर उसकी अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
अनुशासन समिति करेगी मामले की समीक्षा
कांग्रेस संगठन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित नेताओं के स्पष्टीकरण मिलने के बाद पूरा मामला पार्टी की अनुशासन समिति को भेजा जाएगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश नेतृत्व अंतिम निर्णय लेगा।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी और आंतरिक मतभेदों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी नेतृत्व इसे पूरी तरह अनुशासन का मामला बता रहा है।
जिला महिला कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी भंग
घटना के बाद महिला कांग्रेस संगठन ने भी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए पिथौरागढ़ जिला महिला कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है।
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना नगरकोटी द्वारा मंच पर किया गया आचरण संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत पाया गया। सम्मेलन के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों और संगठन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग करने का निर्णय लिया गया है।
आखिर सम्मेलन में हुआ क्या था?
जानकारी के अनुसार, परिवर्तन संकल्प सम्मेलन के दौरान जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष भावना नगरकोटी अपने संबोधन के लिए मंच पर पहुंचीं। भाषण के दौरान उन्होंने नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण और पार्टी लाइन से अलग कार्य करने के मुद्दे पर बिना नाम लिए पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर पर निशाना साधा।
भावना नगरकोटी के बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। विधायक मयूख महर मंच पर ही नाराज हो गए और अपने समर्थकों के साथ सभागार छोड़कर बाहर निकल गए।
स्थिति संभालने की कोशिश भी रही नाकाम
मामले को शांत कराने के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने भावना नगरकोटी से अपना संबोधन समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने बोलना जारी रखा।
स्थिति बिगड़ती देख प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्वयं अपनी सीट से उठकर मंच पर पहुंचे और माहौल शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि तब तक विधायक मयूख महर अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल से बाहर जा चुके थे।
समर्थकों की नारेबाजी से और बढ़ा विवाद
विधायक मयूख महर के सभागार से बाहर निकलते ही उनके समर्थक भी कार्यक्रम छोड़कर जाने लगे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में “मयूख महर मुर्दाबाद” के नारे लगाए, जिससे सम्मेलन का माहौल और अधिक गरमा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर ला दिया, जिसके बाद प्रदेश नेतृत्व ने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी।
निष्कर्ष
पिथौरागढ़ परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में हुए विवाद ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने और जिला महिला कांग्रेस की पूरी कार्यकारिणी भंग करने से स्पष्ट संकेत मिला है कि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक मंच पर अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। अब सभी की नजर अनुशासन समिति की रिपोर्ट और प्रदेश नेतृत्व के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।



