नैनीताल | 30 जून 2026
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट से आरोपियों को बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने मामले में दोषी ठहराए गए पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर की जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों आरोपियों ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील और जमानत याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने फिलहाल दोनों दोषियों को कोई राहत देने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 निर्धारित की है।
आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर की थी अपील
कोटद्वार की निचली अदालत ने 30 मई 2025 को अंकिता भंडारी हत्याकांड में पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर सहित अन्य आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों दोषियों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। साथ ही अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहा किए जाने की मांग भी की गई थी।
हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की खंडपीठ के समक्ष हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 जुलाई तय की है।
बचाव पक्ष ने आत्महत्या का रखा तर्क
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया कि अंकिता भंडारी की मृत्यु आत्महत्या का मामला है और आरोपियों का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।
बचाव पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि चूंकि मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है, इसलिए अपील की सुनवाई पूरी होने तक दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाए।
सरकार और पीड़ित पक्ष ने किया कड़ा विरोध
राज्य सरकार और पीड़ित परिवार की ओर से जमानत याचिका का जोरदार विरोध किया गया।
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना के बाद रिसॉर्ट परिसर में मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। होटल के एक हिस्से को ध्वस्त किया गया, आगजनी हुई और कई अहम सबूत मिटाने की कोशिश की गई।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध व्हाट्सएप चैट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाण मामले को मजबूत बनाते हैं। यदि आरोपियों की कोई भूमिका नहीं थी, तो फिर सबूतों से छेड़छाड़ और उन्हें नष्ट करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
जांच में मिले थे कई महत्वपूर्ण साक्ष्य
अभियोजन पक्ष के अनुसार जांच के दौरान यह पाया गया था कि घटना के समय आरोपियों की मोबाइल लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी। फोरेंसिक जांच में भी यह तथ्य सामने आया था।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि रिसॉर्ट के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे तथा डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) से भी कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी। व्हाट्सएप चैट में भी कई ऐसे तथ्य मिले, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
47 गवाहों के आधार पर सुनाई गई थी सजा
कोटद्वार की निचली अदालत में चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 47 गवाह प्रस्तुत किए थे। उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अब उसी फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील विचाराधीन है।
क्या है पूरा मामला?
पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ श्रीकोट निवासी अंकिता भंडारी वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं।
आरोप है कि रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्या, उसके सहयोगी सौरभ भास्कर और अंकित ने सितंबर 2022 में अंकिता की हत्या कर उसका शव चीला बैराज की नहर में फेंक दिया था।
घटना के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद निचली अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। तब से सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होगी। इस दौरान अदालत दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल अंकिता भंडारी हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह फैसला आरोपियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने फिलहाल जमानत देने से इनकार कर स्पष्ट संकेत दिया है कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अपील पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।


