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घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न पीड़ित महिलाओं को ‘गोल्डन आवर’ में मिलेगी त्वरित सहायता, देहरादून में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

देहरादून, उत्तराखंड | 11 जुलाई 2026

घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों की शिकार महिलाओं को समयबद्ध न्याय, बेहतर चिकित्सा सुविधा, मानसिक संबल और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के सहयोग से शनिवार को देहरादून स्थित यूसीएफ सदन में गढ़वाल मंडल के वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) कर्मियों, महिला हेल्प डेस्क पुलिसकर्मियों, विधिक विशेषज्ञों और बाल विकास विभाग के अधिकारियों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक कानूनी प्रक्रियाओं, मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सा सहायता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित करना रहा।

गढ़वाल मंडल के सभी जिलों से पहुंचे प्रतिभागी

कार्यशाला में देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी सहित गढ़वाल मंडल के सभी जिलों के वन स्टॉप सेंटर के काउंसलर, केस वर्कर, महिला चिकित्सक, महिला हेल्प डेस्क पुलिसकर्मी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के प्रतिनिधि, संरक्षण अधिकारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

इस दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और पीड़ित महिलाओं को शीघ्र एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने संवेदनशील व्यवहार पर दिया जोर

कार्यशाला का शुभारंभ उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा राज्य महिला आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि जब कोई महिला घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न या कार्यस्थल पर शोषण जैसी परिस्थितियों से गुजरकर सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर या पुलिस के पास पहुंचती है, तब सबसे पहले उससे जुड़े अधिकारी और कर्मचारी उसकी उम्मीद बनते हैं।

कुसुम कण्डवाल ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की गोपनीयता बनाए रखना, उसकी मानसिक स्थिति को समझना और उसे विश्वास दिलाना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पीड़िता की पहचान और सम्मान की रक्षा हर स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।

तैयार होंगे ‘मास्टर ट्रेनर्स’

महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रतिभागियों को जानकारी देना नहीं है, बल्कि ऐसे ‘मास्टर ट्रेनर्स’ तैयार करना है जो भविष्य में जिला और स्थानीय स्तर पर अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित कर सकें।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारी जमीनी स्तर पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, समय पर सहायता और न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

नए कानूनों और त्वरित न्याय प्रक्रिया की दी गई जानकारी

कार्यशाला के विधिक सत्र में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त रजिस्ट्रार जनरल वी.के. माहेश्वरी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), घरेलू हिंसा अधिनियम तथा पॉक्सो अधिनियम के नए प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नए कानूनी प्रावधानों के माध्यम से महिलाओं से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं त्वरित बनाया गया है, जिससे पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।

ट्रॉमा से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श पर विशेष प्रशिक्षण

दून विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजेश भट्ट ने ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड काउंसलिंग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए बताया कि हिंसा और यौन अपराधों की शिकार महिलाओं की मानसिक स्थिति बेहद संवेदनशील होती है।

उन्होंने कहा कि काउंसलर का पहला दायित्व पीड़िता की भावनाओं को समझना, उसे मानसिक अवसाद से बाहर निकालना और ऐसा सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वह बिना किसी भय के अपनी बात रख सके।

साथ ही उन्होंने ऐसे मामलों में कार्य करने वाले कर्मियों को स्वयं के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने के आवश्यक उपाय बताए।

‘गोल्डन आवर’ में चिकित्सा सहायता पर दिया गया विशेष जोर

स्वास्थ्य विभाग की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना सुन्द्रियाल ने यौन अपराध और घरेलू हिंसा से जुड़ी पीड़ित महिलाओं को ‘गोल्डन आवर’ यानी शुरुआती एक घंटे के भीतर प्राथमिक उपचार, मेडिकल परीक्षण और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई।

उन्होंने कहा कि इस दौरान पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए तथा प्रत्येक चिकित्सा प्रक्रिया उसकी गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए पूरी की जानी चाहिए।

साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्यों पर भी हुआ प्रशिक्षण

पुलिस क्षेत्राधिकारी डोईवाला वंदना वर्मा ने साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, डिजिटल फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से संबंधित मामलों में पुलिस की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और पुलिस, वन स्टॉप सेंटर तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करना पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सरकारी योजनाओं और पुनर्वास पर भी हुआ मार्गदर्शन

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जेंडर संवेदनशीलता, महिला पुनर्वास योजनाओं, सरकारी सहायता कार्यक्रमों तथा वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी पीड़िता के साथ पूर्वाग्रह या निर्णयात्मक सोच के बजाय पूरी संवेदनशीलता और सर्वाइवर सेंट्रिक अप्रोच अपनाना ही प्रभावी सहायता का आधार है।

प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से किए सवाल

कार्यशाला के अंतिम सत्र में गढ़वाल मंडल से आए वन स्टॉप सेंटर कर्मियों, महिला हेल्प डेस्क पुलिसकर्मियों, अधिवक्ताओं और बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए और विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

बाल विकास विभाग की निदेशक (आईसीडीएस) ने सभी प्रतिभागियों से टीम भावना के साथ कार्य करने और विभागीय समन्वय को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल, उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी, सदस्य सचिव उर्वशी चौहान, निदेशक आईसीडीएस बी.एल. राणा, आयोग के विधि अधिकारी दयाराम सिंह, पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

देहरादून में आयोजित यह राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और त्वरित न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यशाला के माध्यम से तैयार किए जा रहे प्रशिक्षित ‘मास्टर ट्रेनर्स’ भविष्य में जिला और स्थानीय स्तर पर पुलिस, वन स्टॉप सेंटर और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे। इससे घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और साइबर अपराध की शिकार महिलाओं को ‘गोल्डन आवर’ में चिकित्सा सहायता, कानूनी संरक्षण, मानसिक संबल और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।

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