चमोली | 1 सितंबर 2026
उत्तराखंड की प्रसिद्ध और आस्था से जुड़ी मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा की तैयारियों के बीच चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र का सुंग गांव एक बार फिर विशेष चर्चा में आ गया है। करीब ढाई दशक के अंतराल में गांव में तीसरी बार चौसिंग्या खाड़ू के जन्म लेने से ग्रामीणों और मां नंदा के श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
इस वर्ष सुंग गांव में जन्मा चौसिंग्या खाड़ू आगामी 5 सितंबर को आयोजित होने वाली मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में शामिल होगा और धार्मिक परंपराओं के अनुसार यात्रा की अगुवाई करते हुए मां नंदा की उत्सव डोली के साथ कैलाश की ओर प्रस्थान करेगा।
ढाई दशक में तीसरी बार सुंग गांव में हुआ चौसिंग्या खाड़ू का जन्म
सुंग गांव के लिए यह अवसर विशेष माना जा रहा है, क्योंकि करीब 25 वर्षों के दौरान तीसरी बार गांव में चौसिंग्या खाड़ू का जन्म हुआ है। स्थानीय ग्रामीण इसे मां नंदा की विशेष कृपा और आशीर्वाद के रूप में देख रहे हैं।
इस बार करीब आठ माह का चौसिंग्या खाड़ू गांव के वर्तमान उपप्रधान रमेश सिंह बिष्ट की गौशाला में पैदा हुआ है। खाड़ू के जन्म के समय ही रमेश सिंह बिष्ट ने संकल्प लिया था कि यदि नंदा देवी की राजजात या बड़ी जात यात्रा का अवसर आया तो वह इसे मां नंदा को समर्पित करेंगे।
अब यात्रा का समय नजदीक आने के साथ ही उनका यह संकल्प पूरा होने जा रहा है।
वर्ष 2000 और 2014 में भी सुंग गांव से गया था चौसिंग्या खाड़ू
ग्रामीणों के अनुसार सुंग गांव में इससे पहले भी दो बार चौसिंग्या खाड़ू का जन्म हो चुका है। वर्ष 2000 में गांव के बिलोख सिंह के यहां चौसिंग्या खाड़ू का जन्म हुआ था।
इसके बाद वर्ष 2014 में केदार सिंह बिष्ट के यहां भी चौसिंग्या खाड़ू पैदा हुआ था। दोनों अवसरों पर सुंग गांव में जन्मा चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा की राजजात यात्रा का हिस्सा बना था।
अब तीसरी बार इसी गांव में चौसिंग्या खाड़ू के जन्म लेने से ग्रामीणों में धार्मिक उत्साह और अधिक बढ़ गया है। गांव के लोग इसे एक शुभ संयोग के रूप में देख रहे हैं।
3 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर पहुंचेगा चौसिंग्या खाड़ू
ग्राम प्रधान तीरथ सिंह ने बताया कि 3 सितंबर को सुंग गांव के ग्रामीण चौसिंग्या खाड़ू को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर लेकर जाएंगे।
इस दौरान गांव से श्रद्धालु ढोल-दमाऊ और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ धार्मिक यात्रा के रूप में कुरुड़ पहुंचेंगे। मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी और मां नंदा का आशीर्वाद लिया जाएगा।
पूजा-अर्चना के बाद चौसिंग्या खाड़ू को बड़ी जात यात्रा की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाएगा।
मां नंदा की यात्रा का अगुवा माना जाता है चौसिंग्या खाड़ू
उत्तराखंड की लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं में चौसिंग्या खाड़ू का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे मां नंदा की यात्रा का अगुवा और मार्गदर्शक माना जाता है।
चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा की उत्सव डोली के आगे चलता है और यात्रा की प्रमुख धार्मिक परंपराओं का हिस्सा होता है। इसी कारण नंदा देवी की राजजात और बड़ी जात यात्रा में चौसिंग्या खाड़ू का विशेष स्थान माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए चौसिंग्या खाड़ू केवल यात्रा का हिस्सा नहीं, बल्कि मां नंदा की लोक आस्था और हिमालयी संस्कृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
5 सितंबर को कैलाश के लिए रवाना होगी मां नंदा की उत्सव डोली
नंदा देवी बड़ी जात यात्रा के तहत आगामी 5 सितंबर को नंदा राजराजेश्वरी की उत्सव डोली कैलाश की ओर रवाना होगी। इस दौरान सुंग गांव में जन्मा चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा की यात्रा की अगुवाई करेगा।
यात्रा को लेकर सुंग गांव सहित पूरे क्षेत्र में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस धार्मिक अवसर की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
मां नंदा की लोकजात यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
निष्कर्ष
चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र के सुंग गांव में तीसरी बार चौसिंग्या खाड़ू का जन्म होना ग्रामीणों के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। वर्ष 2000 और 2014 के बाद एक बार फिर इसी गांव से चौसिंग्या खाड़ू मां नंदा की बड़ी जात यात्रा में शामिल होने जा रहा है।
3 सितंबर को विधि-विधान के साथ इसे सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर ले जाया जाएगा, जबकि 5 सितंबर को मां नंदा की उत्सव डोली के साथ चौसिंग्या खाड़ू यात्रा की अगुवाई करते हुए कैलाश की ओर प्रस्थान करेगा। इस शुभ संयोग ने सुंग गांव और आसपास के क्षेत्रों में मां नंदा की यात्रा को लेकर श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उमंग को और बढ़ा दिया है।


