दिनांक: 25 अप्रैल 2026 | स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
देहरादून में एटीएस कॉलोनी के बाहर शनिवार को उस समय माहौल गर्म हो गया, जब कॉलोनीवासियों ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन DRDO के वैज्ञानिक के साथ कथित मारपीट के मामले के बाद भड़का, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
मारपीट के आरोप से बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर पुनीत अग्रवाल लंबे समय से कॉलोनी में रहने वाले लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करता आ रहा है। गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
हाल ही में 13 अप्रैल को हुए एक मामले ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। DRDO में तैनात वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा के परिवार के अनुसार, गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन पर निर्माण के दौरान मलबा उनके घर की ओर गिर रहा था। इस पर जब माली ने आपत्ति जताई, तो विवाद शुरू हो गया।
वैज्ञानिक के साथ मारपीट का आरोप
आरोप है कि मामूली विवाद पर ही पुनीत अग्रवाल भड़क गया और माली के साथ-साथ परिवार के बुजुर्गों से अभद्रता की। जब अनिरुद्ध शर्मा ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उनके साथ मारपीट की गई।
इस घटना में अनिरुद्ध शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका कान का पर्दा तक फट गया। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पहले भी विवादों में रह चुका है नाम
एटीएस कॉलोनी के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर कई बार विवाद और मारपीट के आरोप लग चुके हैं।
बताया गया कि दीपावली के दौरान उन्होंने पिस्टल लहराई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने उनका असलहा लाइसेंस भी रद्द कर दिया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप
कॉलोनीवासियों का कहना है कि पुनीत अग्रवाल के खिलाफ अब तक तीन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया।
इससे पहले भी लोग एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई।
धरने पर बैठे लोग, कार्रवाई की मांग
लगातार बढ़ती घटनाओं और कार्रवाई के अभाव से नाराज होकर कॉलोनीवासियों ने एटीएस कॉलोनी के गेट पर धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आरोपी बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कॉलोनी में शांति और सुरक्षा बनी रह सके।
निष्कर्ष
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो स्थानीय स्तर पर आक्रोश किस तरह बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाता है।


