तीन मांगों को लेकर सरकार पर बढ़ाया दबाव, मांगें पूरी होने पर आंदोलन पर पुनर्विचार के संकेत
देहरादून, 2 सितंबर 2026
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर उत्तराखंड की राजनीति लगातार गरमाई हुई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। सचिवालय कूच के बाद अब कांग्रेस ने आगामी 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने साफ कहा है कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे वैचारिक और संवैधानिक लड़ाई के रूप में आगे बढ़ाएगी। उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखते हुए चेतावनी दी कि यदि 7 सितंबर से पहले इन मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस मुख्यमंत्री आवास घेराव सहित अपना आंदोलन और तेज करेगी।
कांग्रेस की पहली मांग, कथित शुद्धिकरण करने वालों पर हो कार्रवाई
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हल्द्वानी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद जिस प्रकार मंच और आयोजन स्थल पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाने का मामला सामने आया, उसकी कानून के दायरे में जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि यह आयोजन रैली स्थल के कथित शुद्धिकरण के उद्देश्य से किया गया था। पार्टी ने मांग की है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन ने जाति अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर इस प्रकार की कार्रवाई की है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर भी कार्रवाई की मांग
गणेश गोदियाल ने अपनी दूसरी मांग रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा कथित शुद्धिकरण की घटना को उचित ठहराने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि यदि किसी सार्वजनिक घटना में संविधान और कानून की मूल भावना का उल्लंघन हुआ है तो उससे जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई है।
राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग
कांग्रेस की तीसरी प्रमुख मांग राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में दर्ज मुकदमे को रद्द करने की है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी थी और इस मामले में शिकायतकर्ता की भूमिका में होने के बावजूद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगी और सरकार से राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की गई है।
मांगें नहीं मानी गईं तो सड़क पर उतरेगी कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि कांग्रेस जिस वैचारिक लड़ाई को लड़ना चाहती है, उसके लिए पार्टी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो कांग्रेस इस संघर्ष को सड़कों पर उतरकर भी लड़ेगी।
गोदियाल ने कहा कि 7 सितंबर से पहले यदि सरकार कांग्रेस की तीनों मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो पार्टी मुख्यमंत्री आवास घेराव के फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद की पूरी टाइमलाइन
8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली आयोजित हुई थी।
11 अगस्त को रैली के लिए इस्तेमाल किए गए मंच और क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। यह आयोजन श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास द्वारा किया गया था।
आयोजकों की ओर से धार्मिक आस्था और सफाई से जुड़े उद्देश्य बताए गए, जबकि कांग्रेस ने इसे रैली स्थल और मंच के कथित शुद्धिकरण से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने इस आयोजन को दलित नेताओं और सामाजिक सम्मान से जोड़ते हुए विरोध शुरू किया और कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
13 अगस्त को मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को दलित पहचान और सामाजिक सम्मान से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
खड़गे द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की बात कही थी।
29 अगस्त को राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इस घटना को छुआछूत और दलितों के अपमान से जोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर सवाल खड़े किए।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पूरे मामले को जातिगत रंग देने का आरोप लगाया। भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि धार्मिक आयोजन में विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग शामिल थे, जिनमें अनुसूचित जाति समुदाय के लोग भी शामिल बताए गए।
30 अगस्त को अमित कुमार की शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 29 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयानों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
इसके बाद 31 अगस्त को कांग्रेस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे के विरोध में अपना आंदोलन तेज किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पुलिस मुख्यालय से लेकर हल्द्वानी कोतवाली सहित प्रदेश के विभिन्न थानों और चौकियों में शिकायतें देकर अपना विरोध दर्ज कराया।
7 सितंबर को देहरादून में बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन
अब कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर 7 सितंबर को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि सरकार को तीनों मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा।
कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार यह आंदोलन केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सम्मान, संवैधानिक मूल्यों और वैचारिक संघर्ष से जुड़ा मुद्दा है। दूसरी ओर भाजपा पहले ही कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास बता चुकी है।
निष्कर्ष
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण का मामला अब उत्तराखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस ने 7 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा कर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगों पर होने वाले फैसले पर टिकी है। यदि आंदोलन से पहले कोई समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में देहरादून में कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।


