दिनांक: 23 सितंबर 2026
स्थान: श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
डिजिटल दौर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर में स्टॉकिंग और साइबर स्टॉकिंग की रोकथाम को लेकर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला में स्टॉकिंग और साइबर स्टॉकिंग से जुड़े अपराधों, उनके प्रभाव, कानूनी प्रावधानों, बचाव के तरीकों, मानसिक स्वास्थ्य और उपलब्ध सहायता तंत्र की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने और साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के उपाय भी बताए।
समय के साथ बदला अपराध का तरीका
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ अपराध करने के तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले स्टॉकिंग की घटनाएं मुख्य रूप से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर स्टॉकिंग जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं आज घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ खेती, पशुपालन, सरकारी और निजी क्षेत्र की सेवाओं के अलावा राष्ट्र रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में आयोग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से आयोग का प्रयास रहा है कि किसी भी पीड़ित महिला को न्याय के लिए भटकना न पड़े।
उनके अनुसार, फोन, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों पर आयोग की ओर से त्वरित कार्रवाई की जाती है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों के समाधान के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर संबंधित महिला के क्षेत्र में ही समस्या के समाधान का प्रयास किया जाता है।
नारी की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी: कुलपति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में पारिवारिक संवाद और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को मातृशक्ति के रूप में सम्मान दिया गया है और महिलाओं की सुरक्षा समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
विशिष्ट अतिथि एवं महापौर आरती भंडारी ने कहा कि तकनीक ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसका इस्तेमाल सावधानी से नहीं किया जाए तो यही तकनीक नुकसान का कारण भी बन सकती है। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करते समय विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्टॉकिंग को लेकर कानूनी प्रावधानों की जानकारी
तकनीकी और कानूनी सत्र में पुलिस उप निरीक्षक सुषमा उनियाल ने स्टॉकिंग से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिना सहमति किसी व्यक्ति का पीछा करना स्टॉकिंग की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत पहली बार अपराध पर तीन वर्ष और दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा के प्रावधान की जानकारी दी।
उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया पर अनजान लोगों को फॉलो करने से बचने और अपनी निजी जानकारी साझा न करने की सलाह दी। साइबर अपराध की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
लगातार निगरानी से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ. श्वेता कृष्णा ने साइबर स्टॉकिंग के मानसिक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा लगातार निगरानी रखे जाने या ऑनलाइन परेशान किए जाने से पीड़ित व्यक्ति मानसिक दबाव और अवसाद जैसी स्थिति की ओर जा सकता है।
उन्होंने युवाओं के लिए नियमित काउंसलिंग और डिजिटल दुनिया के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में अत्यधिक उलझने के बजाय युवाओं को अपने मानसिक स्वास्थ्य और वास्तविक जीवन के रिश्तों पर भी ध्यान देना चाहिए।
सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट रखने की सलाह
अधिवक्ता लक्ष्मी और साइबर सेल श्रीनगर के प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार ने साइबर अपराध से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी किसी भी भौगोलिक सीमा से बाहर बैठकर लोगों को निशाना बना सकते हैं।
विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट रखने, अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने और किसी भी अवांछित APK फाइल को डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी। साथ ही ऑनलाइन बिल भुगतान केवल अधिकृत वेबसाइट या विश्वसनीय माध्यम से करने और सोशल मीडिया पर अपनी लोकेशन सार्वजनिक करने से बचने की अपील की गई।
बड़ी संख्या में छात्राओं और महिलाओं ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनु राही ने किया। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चंद्रकला तिवारी, आयोग की सदस्य दर्शनी पवार, विजया रावत और बत्सला सती, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. वाईपी रेवानी, प्रो. मंजू गुसाईं, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रमिला भंडारी, आशा पैन्यूली सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, स्थानीय महिलाएं, आयोग के कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
निष्कर्ष: श्रीनगर में आयोजित कार्यशाला के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को स्टॉकिंग तथा साइबर स्टॉकिंग के खतरों और कानूनी उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय निजी जानकारी की सुरक्षा, संदिग्ध लिंक से बचने और साइबर अपराध होने पर तत्काल शिकायत करने पर जोर दिया गया। महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए जागरूकता अभियानों को आगे भी जारी रखने की बात कही।






