देहरादून | 12 अगस्त 2026
उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों से सीधा संवाद स्थापित करने और सामाजिक सेवा गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी के एनजीओ प्रकोष्ठ ने एक नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त से प्रदेशभर में ‘एक रविवार-एक गांव, एक घंटा-समाज के नाम’ अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के तहत भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता प्रत्येक रविवार किसी एक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों के साथ संवाद करेंगे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सामाजिक सेवा कार्यों को अंजाम देंगे।
गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं और जरूरतों को समझने की पहल
भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ का यह अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य गांवों तक पहुंचकर ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है। अभियान के माध्यम से गांवों की वास्तविक जरूरतों को समझने और स्थानीय स्तर पर छोटे लेकिन प्रभावी सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
प्रकोष्ठ का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसी समस्याएं होती हैं, जिनका समाधान सामुदायिक सहयोग और जनभागीदारी से किया जा सकता है। इसी सोच के साथ इस अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है।
बड़े आयोजनों के बजाय जमीनी स्तर पर सेवा का लक्ष्य
अभियान के प्रदेश संयोजक सुशील बहुगुणा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बड़े और खर्चीले कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है। इसके बजाय संगठन गांवों तक पहुंचकर लोगों के बीच समय बिताएगा और उनकी समस्याओं को समझते हुए सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के साथ संवाद स्थापित करना, उनकी अपेक्षाओं को जानना और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उपयोगी कार्य करना ही इस अभियान की मूल भावना है।
मधु जैन को सौंपी गई अभियान की जिम्मेदारी
अभियान के सफल संचालन के लिए भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ की प्रदेश सह-संयोजक मधु जैन को ‘एक रविवार-एक गांव’ अभियान का प्रदेश संयोजक नियुक्त किया गया है।
दायित्व मिलने पर मधु जैन ने भाजपा संगठन और एनजीओ प्रकोष्ठ नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी निष्ठा, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ निभाने का प्रयास करेंगी।
उन्होंने कहा कि अभियान को अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचाने के लिए जिला संयोजकों, सह-संयोजकों, स्थानीय सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्रामवासियों के साथ व्यापक समन्वय स्थापित किया जाएगा।
एक घंटे का कार्यक्रम, तीन चरणों में होगा संचालन
अभियान के तहत प्रत्येक रविवार गांव में एक घंटे का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को तीन चरणों में विभाजित किया गया है ताकि संवाद और सेवा गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।
कार्यक्रम के पहले 10 मिनट ग्रामीणों के साथ संवाद और सामाजिक संकल्प के लिए निर्धारित होंगे। इसके बाद अगले 40 मिनट सेवा कार्य किए जाएंगे। अंतिम 10 मिनट समीक्षा, सुझाव और अगले रविवार की योजना तैयार करने में लगाए जाएंगे।
गांवों की जरूरत के अनुसार होंगे सेवा कार्य
अभियान के दौरान गांव की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न सामाजिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इनमें स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, जलस्रोतों की सफाई, सार्वजनिक स्थलों की देखभाल, बुजुर्गों से मुलाकात और उनकी सहायता जैसे कार्य शामिल होंगे।
इसके अलावा दिव्यांगजनों की मदद, नशामुक्ति जागरूकता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
अभियान का उद्देश्य केवल सेवा कार्य करना नहीं, बल्कि समाज में सहभागिता और सहयोग की भावना को मजबूत करना भी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने पर रहेगा फोकस
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी इस अभियान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगातार बदलते सामाजिक परिवेश में गांवों तक पहुंच बनाना और लोगों के साथ संवाद बनाए रखना किसी भी संगठन के लिए अहम माना जाता है।
भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ का यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने, सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सकारात्मक पहल को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकता है।
स्वतंत्रता दिवस से होगा औपचारिक शुभारंभ
15 अगस्त से शुरू होने वाले इस अभियान के लिए प्रदेशभर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभिन्न जिलों में प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को अभियान की रूपरेखा से अवगत कराया जा रहा है ताकि पहले चरण से ही इसे प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।
आने वाले महीनों में इस अभियान के माध्यम से प्रदेश के अनेक गांवों में नियमित रूप से सेवा और जनसंपर्क गतिविधियां संचालित किए जाने की योजना है।
निष्कर्ष
भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ का ‘एक रविवार-एक गांव, एक घंटा-समाज के नाम’ अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक भागीदारी और सेवा भावना को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल है। 15 अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रत्येक रविवार गांवों में पहुंचकर स्थानीय समस्याओं को समझने और छोटे लेकिन प्रभावी सामाजिक कार्यों को अंजाम देने का प्रयास किया जाएगा। यदि यह अभियान निरंतर और प्रभावी रूप से संचालित होता है तो ग्रामीण समाज में जनसहभागिता और सामाजिक जागरूकता को नई मजबूती मिल सकती है।


