उत्तरकाशी | 12 अगस्त 2026
गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सोनगाड़ में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) की ओर से बनाई जा रही सुरक्षा दीवार का करीब 50 मीटर से अधिक हिस्सा धंसकर नदी में बह गया। निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद दीवार के क्षतिग्रस्त होने से कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, लिम्चागाड़ में भी हाईवे के नीचे बनाई गई आरसीसी और वायरक्रेट सुरक्षा संरचना में धंसाव की स्थिति सामने आई है।
निर्माण के कुछ ही दिन बाद धंसने लगी दीवार
स्थानीय लोगों के मुताबिक सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार का निर्माण पूरा होने के करीब 22 दिन बाद ही इसमें दरारें दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद धीरे-धीरे दीवार का एक बड़ा हिस्सा कमजोर होकर धंस गया और अब करीब 50 मीटर से अधिक हिस्सा नदी में समा चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान ही सामने आई दरारों की गंभीरता से जांच की जाती तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था। अब सुरक्षा दीवार के बह जाने के बाद हाईवे की सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है।
पिछले साल की आपदा के बाद शुरू हुए थे सुरक्षा कार्य
स्थानीय निवासी राजेश रावत के अनुसार पिछले वर्ष आई आपदा में लिम्चागाड़ का पुल बह गया था और आसपास के सड़क मार्ग को भी भारी नुकसान पहुंचा था। सोनगाड़ के पास गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा भी नदी की चपेट में आ गया था। इसके चलते क्षेत्र में लंबे समय तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रही।
आपदा के करीब दस महीने बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों में दोबारा निर्माण और सुरक्षा कार्य शुरू किए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन कार्यों में निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
निर्माण सामग्री को लेकर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने सोनगाड़ और लिम्चागाड़ में तैयार की जा रही सुरक्षा संरचनाओं में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुरक्षा दीवारों में बड़े आकार के पत्थरों और मिट्टी का अधिक इस्तेमाल किया गया, जबकि सीमेंट की मात्रा पर्याप्त नहीं रखी गई।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कई स्थानों पर केवल बाहरी हिस्से को मजबूत दिखाने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
लिम्चागाड़ में भी सुरक्षा संरचना में धंसाव
सोनगाड़ के अलावा लिम्चागाड़ में भी हाईवे की सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। यहां सड़क से करीब 100 मीटर नीचे बनाई गई आरसीसी दीवार और वायरक्रेट सुरक्षा संरचना में धंसाव शुरू हो गया है।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में सड़क की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। हाईवे पर वाहनों की आवाजाही के बीच किसी बड़े हिस्से के कमजोर होने से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।
निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की मांग
सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार के बड़े हिस्से के नदी में बहने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, डिजाइन, नींव और कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, ठेकेदार या निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
BRO ने जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात कही
बीआरओ के कमांडर राजकिशोर ने सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जा रही है।
कमांडर के अनुसार जांच के दौरान निर्माण कार्य की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाईवे की सुरक्षा पर टिकी निगाहें
गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग चारधाम यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में सोनगाड़ और लिम्चागाड़ में सुरक्षा कार्यों के क्षतिग्रस्त होने से प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के सामने चुनौती बढ़ गई है।
अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में दीवार के धंसने की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और हाईवे को सुरक्षित रखने के लिए बीआरओ की ओर से तत्काल क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार का 50 मीटर से अधिक हिस्सा नदी में बहना केवल निर्माण गुणवत्ता का सवाल नहीं, बल्कि गंगोत्री हाईवे की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। पिछले वर्ष की आपदा के बाद करोड़ों रुपये खर्च कर किए जा रहे सुरक्षा कार्यों में यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। अब जांच कमेटी की रिपोर्ट पर स्थानीय लोगों के साथ यात्रियों और वाहन चालकों की भी नजर रहेगी।


