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गोपेश्वर में बंदर-लंगूरों का बढ़ा आतंक, बच्चे को लेकर जा रहे अभिभावक पर किया हमला

चमोली | 12 अगस्त 2026

चमोली जिले के गोपेश्वर में बंदरों और लंगूरों की बढ़ती संख्या अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनती जा रही है। बाजारों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास झुंड में घूम रहे बंदर और लंगूर राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। ताजा मामला गणेश मंदिर के पास सामने आया, जहां एक अभिभावक अपने छोटे बच्चे को लेकर जा रहा था। इसी दौरान एक बंदर ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

बच्चे को संभालते हुए अभिभावक ने बचाई जान

गणेश मंदिर के पास अचानक हुए बंदर के हमले से अभिभावक घबरा गया। उसके साथ छोटा बच्चा भी था। हमले के दौरान उसने किसी तरह बच्चे को संभाला और खुद को सुरक्षित किया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों में लगातार डर बना रहता है। खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को अकेले आवाजाही करने में परेशानी हो रही है।

कई इलाकों में झुंड बनाकर घूम रहे बंदर-लंगूर

गोपेश्वर के विभिन्न मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों और लंगूरों के झुंड देखे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक भोजन की तलाश में ये बंदर घरों, दुकानों और बाजारों के आसपास पहुंच जाते हैं। कई बार लोगों के हाथ से सामान छीनने और राहगीरों को डराने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।

लोगों का कहना है कि यह समस्या अचानक सामने नहीं आई है। लंबे समय से नगर क्षेत्र में बंदरों की संख्या बढ़ रही है और कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

नगर पालिका और वन विभाग से कार्रवाई की मांग

बंदरों के आतंक से परेशान स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन और वन विभाग से प्रभावी अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल कुछ दिनों के लिए अभियान चलाने से समस्या खत्म नहीं होगी। बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के साथ ऐसे स्थानों की पहचान भी जरूरी है जहां उनके झुंड लगातार पहुंच रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्कूलों और बाजारों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि बच्चों और आम राहगीरों को हमले का सामना न करना पड़े।

पहले भी बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान

नगर पालिका की ओर से पहले भी बंदरों को पकड़ने के लिए टीम बुलाई जा चुकी है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। बंदरों के दोबारा नगर क्षेत्र में पहुंचने के कारण लोगों की परेशानी बनी हुई है।

लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वन विभाग ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा

बदरीनाथ वन प्रभाग की डीएफओ प्रणाली रमेश ने बंदरों की समस्या को लेकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्हें पकड़ने की व्यवस्था जल्द की जाएगी। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और बंदरों को पकड़कर लोगों को राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बेरीनाग में लंगूर के हमले के बाद महिला की हुई थी मौत

बंदर और लंगूरों के हमले का खतरा केवल गोपेश्वर तक सीमित नहीं है। पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग में भी लंगूर के हमले से घायल हुई एक बुजुर्ग महिला की उपचार के दौरान मौत हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार 21 मार्च को बेरीनाग नगर पालिका क्षेत्र के सागंड निवासी 60 वर्षीय लीला देवी पर घर के आंगन में लंगूर ने हमला कर दिया था। लंगूर से बचने की कोशिश में महिला भागते समय गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।

परिजन उन्हें तत्काल हल्द्वानी लेकर पहुंचे। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर किया, जिसके बाद उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 12 दिनों तक उपचार चलने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया।

बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

बेरीनाग की घटना और गोपेश्वर में सामने आया ताजा हमला यह संकेत देता है कि पहाड़ी नगर क्षेत्रों में बंदरों और लंगूरों का बढ़ता आतंक अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गया है। इनके हमलों से गंभीर चोट और जान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

ऐसे में वन विभाग और स्थानीय निकायों के सामने चुनौती है कि बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने के साथ लोगों और वन्यजीवों के बीच बढ़ रहे टकराव को कम करने के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था तैयार की जाए।

निष्कर्ष

गोपेश्वर में बच्चे के साथ जा रहे अभिभावक पर बंदर के हमले ने एक बार फिर नगर क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता सामने ला दी है। स्थानीय लोग लंबे समय से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और अब वन विभाग की ओर से जल्द अभियान चलाने का भरोसा दिया गया है। लोगों को उम्मीद है कि इस बार कार्रवाई केवल अस्थायी न रहकर बंदरों और लंगूरों की समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में होगी।

 

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