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दहेज के लिए हैवानियत: पत्नी को जिंदा जलाने की कोशिश, ‘तीन तलाक’ देकर घर से निकाला

स्थान: रुड़की / हरिद्वार
तारीख: 22 अप्रैल 2026

रुड़की: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां दहेज की मांग पूरी न होने पर एक महिला को न केवल प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसे जिंदा जलाने का प्रयास भी किया गया। आरोप है कि जब आरोपी इस कोशिश में नाकाम रहा तो उसने पत्नी को ‘तीन तलाक’ देकर घर से बाहर निकाल दिया।


पीड़िता शना ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका निकाह 12 फरवरी 2023 को सद्दाम नामक युवक के साथ हुआ था। पीड़िता के पिता गुलशेर अली के अनुसार, उन्होंने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर करीब 40 लाख रुपये शादी में खर्च किए थे, जिसमें नकद राशि और सोने-चांदी के जेवर भी शामिल थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें लगातार बढ़ती रहीं।


परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पति, सास-ससुर और अन्य रिश्तेदारों ने 10 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर महिला के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न बढ़ता गया।


पीड़िता के अनुसार, सितंबर 2025 में बेटी के जन्म के बाद हालात और खराब हो गए। बच्ची को बोझ बताकर ताने दिए गए और महिला को प्रताड़ित किया जाने लगा। यहां तक कि रमजान के पवित्र महीने में भी उसे भूखा-प्यासा रखकर मारपीट की गई।


आरोप है कि 17 अप्रैल को ससुराल पक्ष ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। महिला को लाठी-डंडों से पीटा गया और उसके ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की गई। किसी तरह जान बचाकर पीड़िता ने खुद को कमरे में बंद किया और अपने परिजनों को सूचना दी।


सूचना पर पहुंचे माता-पिता और मामा के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें बंधक बना लिया गया। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद ही सभी की जान बच सकी। इसी दौरान आरोपी पति ने पीड़िता को ‘तीन तलाक’ देकर घर से निकाल दिया और दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी।


घायल अवस्था में पीड़िता ने रुड़की के सरकारी अस्पताल में मेडिकल कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुख्य आरोपी पति समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।


थाना प्रभारी के अनुसार, मामले की गहन जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष:
यह घटना समाज में दहेज प्रथा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा की गंभीर तस्वीर पेश करती है। कानून सख्त होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं, जिन पर सख्ती से रोक लगाने की आवश्यकता है।

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