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महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम तेज, देहरादून में विधानसभा घेरने उतरेगी कांग्रेस

स्थान: देहरादून
तारीख: 22 अप्रैल 2026

देहरादून: महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अब इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड में कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए विधानसभा के बाहर बड़ा धरना देने का ऐलान किया है।


कांग्रेस का कहना है कि संसद में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के आधार पर राज्य की विधानसभाओं में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर गुरुवार को देहरादून स्थित विधानसभा भवन के बाहर पार्टी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगी।


धरने से एक दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर चुका है, इसके बावजूद इसे लागू करने में देरी की जा रही है।


कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर देश में नया परिसीमन लागू कर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसी रणनीति के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, जिसका विपक्ष ने विरोध किया।


प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा ने कहा कि वर्तमान में स्थिति विचित्र है, जहां सत्ता पक्ष ही विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है।


वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर राज्यभर में ब्लॉक स्तर तक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।


कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया गया था। कांग्रेस का दावा है कि 2023 में भी उसने महिला आरक्षण कानून पारित कराने में सकारात्मक भूमिका निभाई।


निष्कर्ष:
महिला आरक्षण को लेकर सियासी टकराव अब सड़कों तक पहुंच गया है। देहरादून में प्रस्तावित कांग्रेस का धरना इस मुद्दे को और तेज करने वाला है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड समेत देश की राजनीति में बड़ा केंद्र बिंदु बन सकता है।

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