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राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में सीएम धामी ने दिए सख्त निर्देश, कम ऋण-जमा अनुपात वाले जिलों पर जताई नाराजगी

देहरादून | 9 जुलाई 2026

उत्तराखंड में वित्तीय समावेशन, स्वरोजगार और आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में बैंकिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कई जिलों में ऋण-जमा अनुपात (क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो) अपेक्षा से कम होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बैंक अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्थिति में शीघ्र सुधार लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास, निवेश, उद्योग, रोजगार सृजन और वित्तीय समावेशन में बैंकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आम नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और उद्यमियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए बैंकिंग सेवाएं सरल और सुलभ रूप से उपलब्ध हों।

बैठक में विशेष रूप से बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी जिलों में कम ऋण-जमा अनुपात पर मुख्यमंत्री ने असंतोष जताया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन जिलों में नियमित रूप से ऋण शिविर आयोजित किए जाएं ताकि पात्र लाभार्थियों तक बैंकिंग सेवाएं और ऋण योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि बैंक केवल जमा स्वीकार करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऋण वितरण को भी प्राथमिकता दें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए सभी विभाग और बैंक आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र लाभार्थी को केवल दस्तावेजों में छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता देकर पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ा जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप, स्वरोजगार और होम-स्टे जैसे क्षेत्रों में बैंकों के सहयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि पिछड़े और कम विकसित क्षेत्रों में भी बैंक सक्रिय भूमिका निभाएं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हों और पलायन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को बैंकिंग योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता मातृशक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके लिए बैंकों को ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना होगा, ताकि अधिक से अधिक लोग सरकारी सब्सिडी और वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठा सकें।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने साइबर अपराधों की रोकथाम को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों से भी प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। इससे साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तत्काल समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की प्रत्येक बैठक से पहले उप-समिति (सब-कमेटी) की नियमित बैठक आयोजित की जाए। इससे विभिन्न बैंकिंग और वित्तीय मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की जा सकेगी तथा समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित होगा। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागों और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।

बैठक में विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकार के विभागीय अधिकारी तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस दौरान प्रदेश में वित्तीय समावेशन, सरकारी योजनाओं की प्रगति, ऋण वितरण, निवेश बढ़ाने और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

निष्कर्ष

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तराखंड के संतुलित आर्थिक विकास के लिए बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक सक्रिय एवं जवाबदेह बनाना होगा। कम ऋण-जमा अनुपात वाले जिलों में विशेष प्रयास, महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता, स्वरोजगार को बढ़ावा तथा साइबर सुरक्षा को मजबूत करने जैसे निर्देश प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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