दिनांक: 27 जून 2026
स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। पिछले छह वर्षों में आबादी वाले क्षेत्रों में भटककर पहुंचे 8,343 वन्यजीवों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इनमें जहरीले और गैर-जहरीले सांपों से लेकर मगरमच्छ, अजगर, हिरण, चीतल, सांभर, नीलगाय, बंदर, लंगूर, मॉनिटर लिजार्ड, पक्षी और गुलदार जैसे खतरनाक वन्यजीव भी शामिल रहे।
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच संचालित विशेष रेस्क्यू अभियानों के दौरान हजारों वन्यजीवों की जान बचाई गई और उन्हें बिना किसी नुकसान के जंगलों में पुनः स्थापित किया गया।
सांपों से लेकर मगरमच्छ तक, हजारों वन्यजीवों को सुरक्षित लौटाया गया जंगल
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार छह वर्षों में सबसे अधिक 6,579 सांपों का रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा 466 हिरण वर्गीय वन्यजीव जिनमें नीलगाय, चीतल और सांभर शामिल हैं, सुरक्षित जंगलों में छोड़े गए।
इसी अवधि में 399 बंदर एवं लंगूर, 262 मगरमच्छ, 233 मॉनिटर लिजार्ड, 240 पक्षियों सहित कई अन्य वन्यजीवों को भी आबादी वाले क्षेत्रों से निकालकर उनके प्राकृतिक आवास में पहुंचाया गया। विभाग के अनुसार अधिकांश पक्षी चाइनीज मांझे की चपेट में आने से घायल अवस्था में मिले, जिनका उपचार कर उन्हें फिर से उड़ान भरने योग्य बनाया गया।
मॉनसून में बढ़ जाती हैं वन्यजीवों की आवाजाही, विभाग ने पहले से की पूरी तैयारी
हरिद्वार जिले में मॉनसून के दौरान गंगा और उससे जुड़े जल स्रोतों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ, सांप और अन्य सरीसृप अक्सर रिहायशी इलाकों, खेतों, घरों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वन विभाग ने अपनी क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को पहले से सक्रिय कर दिया है।
पिछले एक वर्ष में ही एक हजार से अधिक वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचे थे, जिन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया। इस बार मॉनसून से पहले ही सभी टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों ने दिया आधुनिक रेस्क्यू प्रशिक्षण
मॉनसून सीजन को देखते हुए वन विभाग ने अपने कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हर्पेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अभिजीत दास ने वनकर्मियों को विषैले और गैर-विषैले सांपों की पहचान, सुरक्षित रेस्क्यू तकनीक, मानव-सर्प संघर्ष प्रबंधन, प्राथमिक उपचार तथा बचाव अभियान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान टीमों को आधुनिक रेस्क्यू उपकरण जैसे स्नेक हुक, स्नेक स्टिक, स्नेक बैग, सुरक्षात्मक दस्ताने, स्नेयर पोल और अन्य सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए गए, जिससे रेस्क्यू अभियान और अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बन सके।
लक्सर क्षेत्र में घरों तक पहुंचे मगरमच्छ और विशाल अजगर
हरिद्वार के लक्सर रेंज में गंगा, सोलानी और रोह नदी के आसपास बसे क्षेत्रों में मॉनसून के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही सबसे अधिक देखने को मिलती है। भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण कई बार मगरमच्छ घरों के आंगन, खेतों और तालाबों तक पहुंच गए।
वन विभाग की टीम ने लगातार सतर्कता बरतते हुए इन सभी मगरमच्छों का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उन्हें गंगा तट तथा सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा।
मगरमच्छ के हमले और 18 फीट लंबे अजगर ने बढ़ाई चुनौती
लक्सर के केहड़ा गांव में एक दर्दनाक घटना भी सामने आई, जहां सुबह टहलने निकले एक ग्रामीण पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जिससे उसका हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया।
इसी क्षेत्र के एक अन्य गांव में करीब 18 फीट लंबा विशाल अजगर निकल आया था। अजगर का आकार इतना बड़ा था कि उसे पकड़ने में वन विभाग की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सफल रेस्क्यू के बाद उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
वन विभाग की आमजन से अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी क्षेत्र में सांप, मगरमच्छ, अजगर या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू कर सके।
रेंज अधिकारी शीशपाल सिंह ने बताया कि विभाग की क्विक रिस्पांस टीमें पूरी तरह तैयार हैं और मॉनसून के दौरान 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। आधुनिक उपकरणों और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से इस बार रेस्क्यू अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
निष्कर्ष
हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा पिछले छह वर्षों में 8,343 वन्यजीवों का सफल रेस्क्यू उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मॉनसून के दौरान बढ़ने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए विभाग की सक्रिय तैयारी न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि दुर्लभ और संवेदनशील वन्यजीवों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है—मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।



