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कारगी डंपिंग जोन पर एनएचआरसी की सख्ती, देहरादून डीएम से चार सप्ताह में मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

देहरादून | 9 जुलाई 2026

देहरादून के कारगी चौक स्थित डंपिंग जोन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर के बीच संचालित इस डंपिंग स्थल से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को गंभीर मानते हुए आयोग ने देहरादून के जिलाधिकारी से चार सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग का मानना है कि यह मामला नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन के अधिकार से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

यह कार्रवाई देहरादून निवासी मनीष गुप्ता द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में कहा गया था कि कारगी चौक के पास स्थित डंपिंग जोन घनी आबादी, आईएसबीटी, शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट होने के कारण हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लंबे समय से दुर्गंध, प्रदूषण और कचरे के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 19 जून को जारी अपने पत्र में स्पष्ट किया कि शहर के मध्य स्थित इस डंपिंग ग्राउंड की स्थिति मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय है। आयोग ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ वातावरण और स्वस्थ जीवन का अधिकार प्राप्त है, इसलिए प्रशासन को इस दिशा में प्रभावी और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी देहरादून से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।

आयोग ने अपने निर्देशों में इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि शहर के बीच स्थित डंपिंग जोन को भविष्य में शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल की जाए। माना जा रहा है कि आयोग इस मामले की लगातार निगरानी करेगा और प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।

एनएचआरसी के पत्र के बाद देहरादून जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी ने नगर निगम देहरादून के अपर नगर आयुक्त से इस पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। नगर निगम से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि अब तक डंपिंग जोन के संबंध में क्या-क्या कदम उठाए गए हैं, वर्तमान स्थिति क्या है और इसके स्थायी समाधान के लिए भविष्य की क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।

कारगी डंपिंग जोन का विवाद कोई नया नहीं है। पिछले कई वर्षों से स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठन और विभिन्न जनप्रतिनिधि इस डंपिंग स्थल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की मांग उठाते रहे हैं। समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जबकि विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके बावजूद अब तक डंपिंग जोन को स्थानांतरित करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका है।

नगर निगम का कहना रहा है कि वैकल्पिक भूमि की उपलब्धता, तकनीकी प्रक्रियाओं और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते डंपिंग जोन को स्थानांतरित करने में देरी हुई है। हालांकि इस दौरान आसपास की आबादी लगातार बढ़ी है, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पहले की तुलना में और अधिक गंभीर हो गई हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आयोग द्वारा मांगी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट से प्रशासन और नगर निगम पर जवाबदेही बढ़ गई है। आने वाले सप्ताहों में यह स्पष्ट होगा कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाते हैं और कारगी डंपिंग जोन के स्थायी समाधान की दिशा में कितनी प्रगति होती है।

निष्कर्ष

कारगी डंपिंग जोन का मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग की सख्ती ने प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। यदि निर्धारित समय के भीतर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो इससे न केवल हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि देहरादून में स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

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