देहरादून | 9 जुलाई 2026
उत्तराखंड सरकार की बड़ी विकास परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक प्रशासनिक आदेश ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से जारी निर्देशों के तहत पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली जनहित की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा अब कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के माध्यम से संकलित किया जाएगा। इस फैसले को सरकार के भीतर समन्वय व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल भी उठा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार राज्य के विभिन्न विभागों में संचालित पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली सभी महत्वपूर्ण और जनहितकारी परियोजनाओं का विस्तृत विवरण (डिटेल्ड ब्रीफ नोट) तैयार कर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा को उपलब्ध कराया जाएगा। इन योजनाओं की जानकारी की एक प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
यह आदेश मुख्यमंत्री के प्रमुख निजी सचिव भूपेंद्र सिंह बसेड़ा की ओर से सभी मंत्रियों के मुख्य, वरिष्ठ और निजी सचिवों को भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित विभाग अपनी प्रमुख योजनाओं की अद्यतन स्थिति, उद्देश्य, प्रगति और अन्य आवश्यक जानकारी तैयार कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराएं, ताकि उनका समग्र अवलोकन किया जा सके।
राजनीतिक दृष्टि से इस आदेश को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में कई वरिष्ठ और अनुभवी मंत्री मौजूद हैं। इसके बावजूद बड़ी विकास योजनाओं के समन्वय और विवरण संकलन की जिम्मेदारी सबसे युवा मंत्रियों में शामिल सौरभ बहुगुणा को सौंपे जाने से राजनीतिक हलकों में विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य बड़ी परियोजनाओं की नियमित निगरानी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा विकास कार्यों की समीक्षा को अधिक प्रभावी बनाना हो सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस व्यवस्था के पीछे किसी विशेष राजनीतिक या प्रशासनिक कारण की आधिकारिक व्याख्या नहीं की गई है।
इस आदेश के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि विभिन्न विभागों के वरिष्ठ मंत्री अब अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का विवरण सीधे मुख्यमंत्री को भेजने के बजाय पहले सौरभ बहुगुणा के माध्यम से साझा करेंगे। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों के लिए यह असहज स्थिति हो सकती है कि वे अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं का विवरण पहले अपने जूनियर मंत्री को उपलब्ध कराएं और उसके बाद वही जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचे। उनके अनुसार इस व्यवस्था को लेकर सरकार को स्पष्टता देनी चाहिए।
वहीं सरकार की ओर से वरिष्ठ मंत्री खजान दास ने मुख्यमंत्री के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय पूरी कैबिनेट का निर्णय होता है और सरकार सामूहिक रूप से उस पर कार्य करती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस नई व्यवस्था के पीछे के विस्तृत कारणों की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय ही बेहतर ढंग से स्पष्ट कर सकता है।
राजनीतिक जानकार इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों से भी जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार अपने शेष कार्यकाल में बड़ी विकास परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का व्यापक आकलन करना चाहती है, ताकि लंबित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जा सके और भविष्य की विकास योजनाओं का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार सरकार प्रदेशभर में चल रही बड़ी परियोजनाओं का समेकित डाटा तैयार कर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की दिशा में काम कर सकती है। इससे समयबद्ध क्रियान्वयन, बजटीय प्रबंधन तथा भविष्य की घोषणाओं और योजनाओं के लिए भी एक व्यवस्थित आधार तैयार होने की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं के समन्वय की जिम्मेदारी मंत्री सौरभ बहुगुणा को सौंपने के फैसले ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक समन्वय और विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी की दिशा में कदम मान रही है, वहीं विपक्ष इस व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह नया तंत्र केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को मजबूत करता है या फिर प्रदेश की आगामी राजनीतिक रणनीति में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिलती है।


