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लोन के नाम पर ठगी करने वालों पर कसेगा शिकंजा, संदिग्ध मामलों की एसआईटी से होगी जांच

देहरादून | 10 सितंबर 2026

ऋण और ऋण बीमा के नाम पर लोगों से कथित धोखाधड़ी किए जाने की शिकायतों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी आशीष चौहान ने इस तरह के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों और वित्तीय संस्थाओं को ऋण वितरण प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों को लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एजेंटों, बिचौलियों और फर्जी संस्थाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में जिलाधिकारी ने एनबीएफसी और एचएफसी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ऋण वितरण, एजेंटों की भूमिका, रिकवरी प्रक्रिया और फर्जीवाड़े से संबंधित शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की।

शिकायतों की निगरानी के लिए बनेगी समिति

बैठक में जिलाधिकारी ने लीड बैंक मैनेजर को संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति जिले में सामने आने वाली ऋण फर्जीवाड़े की शिकायतों, संदिग्ध ऋण प्रकरणों और एजेंटों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखेगी।

प्रशासन की ओर से हर महीने संबंधित अधिकारियों और वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

गंभीर मामलों में एसआईटी जांच के निर्देश

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा कि गंभीर और संदिग्ध ऋण फर्जीवाड़े के मामलों में आवश्यकता के अनुसार एसआईटी जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी बैंक, वित्तीय संस्था, एजेंट या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहां लोगों की वास्तविक आर्थिक स्थिति और ऋण चुकाने की क्षमता का पर्याप्त परीक्षण किए बिना एजेंटों के माध्यम से लोन स्वीकृत कराने की कोशिश की गई। प्रशासन ने ऐसी किसी भी अनियमितता की स्थिति में संबंधित प्रबंधक और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

फर्जी एजेंसियों और बिचौलियों पर नजर

जिलाधिकारी ने कहा कि ऋण दिलाने के नाम पर आम लोगों को भ्रमित करने वाले एजेंटों और फर्जी एजेंसियों के पूरे नेटवर्क की पहचान करना जरूरी है। प्रशासन ऐसे मामलों में केवल शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करेगा।

उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि को भी संदिग्ध और फर्जी एजेंसियों से संबंधित जानकारी साझा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सके।

सभी एनबीएफसी और एचएफसी से मांगी जाएगी ऋण की जानकारी

जिले में संचालित सभी एनबीएफसी और एचएफसी को उनके द्वारा वितरित किए गए ऋणों और लंबित रिकवरी मामलों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन इन आंकड़ों और रिकॉर्ड की जांच कर संदिग्ध ऋण प्रकरणों को चिन्हित करेगा।

इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कहीं ऋण वितरण के दौरान नियमों की अनदेखी, गलत जानकारी या एजेंटों के स्तर पर किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई।

एसडीएम स्तर पर गठित होंगी टास्क फोर्स

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों यानी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह टास्क फोर्स संबंधित क्षेत्रों में संचालित एनबीएफसी और एचएफसी के साथ-साथ सक्रिय मनीलेंडरों और लोन दिलाने के नाम पर काम करने वाले एजेंटों की जानकारी जुटाएगी।

टास्क फोर्स द्वारा जुटाई गई जानकारी के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर प्रशासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।

वित्तीय संस्थाओं को पारदर्शिता बरतने के निर्देश

जिलाधिकारी ने वित्तीय संस्थाओं से ऋण वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है। प्रशासन का कहना है कि आम लोगों की आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया कि आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को संरक्षण नहीं दिया जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

निष्कर्ष

ऋण और ऋण बीमा के नाम पर सामने आ रही धोखाधड़ी की शिकायतों के बाद देहरादून जिला प्रशासन ने निगरानी और जांच की व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। एनबीएफसी-एचएफसी से ऋण संबंधी विस्तृत जानकारी जुटाने के साथ एसडीएम स्तर पर टास्क फोर्स और गंभीर मामलों में एसआईटी जांच का प्रावधान किया गया है। अब प्रशासन की कार्रवाई का मुख्य फोकस फर्जी एजेंटों, बिचौलियों और संदिग्ध ऋण नेटवर्क की पहचान कर आम लोगों को आर्थिक ठगी से बचाना रहेगा।

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