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उत्तराखंड में भूकंप सुरक्षा पर बड़ा अभियान शुरू, शहरों के भवनों का होगा वैज्ञानिक सर्वे, सीबीआरआई देगा इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण

दिनांक: 27 जून 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

देहरादून। भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील उत्तराखंड में अब शहरों के भवनों की सुरक्षा का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। राज्य सरकार ने भूकंप जोखिम को कम करने और भवनों की संरचनात्मक मजबूती का आकलन करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इस अभियान के तहत केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की के सहयोग से विभिन्न विभागों के इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे शहरों में बने भवनों की भूकंप के प्रति संवेदनशीलता का अध्ययन कर सकें और आवश्यक सुधारों के लिए सुझाव दे सकें।

इस संबंध में हाल ही में आपदा प्रबंधन सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।


नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग की रिपोर्ट बनी आधार

बैठक में बताया गया कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की ने पहले ही नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग में भूकंप जोखिम का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

अध्ययन में तीनों शहर भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील पाए गए हैं। रिपोर्ट में भवनों की संरचनात्मक स्थिति, भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित भूकंपीय प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर अब राज्य के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार का वैज्ञानिक सर्वे कराने की तैयारी की जा रही है।


इंजीनियरों को मिलेगा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित अन्य संबंधित विभागों के इंजीनियरों को सीबीआरआई के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण में भवनों की संरचनात्मक मजबूती का आकलन, भूकंप जोखिम विश्लेषण, सुरक्षा मानकों की जांच, तकनीकी निरीक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद यही प्रशिक्षित इंजीनियर राज्य के विभिन्न शहरों में भवनों का सर्वे कर उनकी सुरक्षा का मूल्यांकन करेंगे।


छोटे शहरों से होगी शुरुआत, बड़े शहरों के लिए अलग योजना

बैठक में तय किया गया कि प्रारंभिक चरण में राज्य के छोटे शहरों में भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा का अध्ययन कराया जाएगा।

वहीं राज्य के दस बड़े शहरों में यह कार्य राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से भवनों की भूकंप सुरक्षा का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है।


भूकंपरोधी निर्माण को लेकर चलेगा जनजागरूकता अभियान

सरकार केवल भवनों का सर्वे कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों को सुरक्षित और भूकंपरोधी भवन निर्माण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

अभियान के तहत भवन निर्माण से जुड़े इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स, ठेकेदारों और आम नागरिकों को यह जानकारी दी जाएगी कि किस प्रकार राष्ट्रीय भवन मानकों के अनुरूप निर्माण करने से भूकंप के दौरान जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निर्माण तकनीकों का पालन भविष्य में संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


क्षमता विकास पर रहेगा विशेष फोकस

हाल ही में आयोजित बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी भाग लिया।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आपदा प्रबंधन विभाग क्षमता विकास, प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता बढ़ाने का कार्य करेगा, जबकि अन्य विभाग अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह पूरी कार्ययोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के निर्देशों के अनुरूप तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।


उत्तराखंड में क्यों जरूरी है यह पहल

उत्तराखंड भूकंप के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल है और राज्य का अधिकांश हिस्सा भूकंपीय जोन-4 एवं जोन-5 में आता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बहुमंजिला भवनों के निर्माण और पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए भवनों की संरचनात्मक मजबूती का नियमित मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते कमजोर भवनों की पहचान और आवश्यक सुधार किए जाने से भविष्य में बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।


निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार की यह पहल राज्य में भूकंप जोखिम प्रबंधन को वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीबीआरआई के सहयोग से इंजीनियरों को प्रशिक्षण, भवनों का तकनीकी सर्वे और भूकंपरोधी निर्माण को बढ़ावा देने की योजना भविष्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो उत्तराखंड के शहर अधिक सुरक्षित, मजबूत और आपदा के प्रति बेहतर तैयार बन सकेंगे।

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