देहरादून | दिनांक: 23 अप्रैल 2026
महिला आरक्षण और नारी वंदन अधिनियम संशोधन बिल को लेकर उत्तराखंड में सियासत तेज हो गई है। राजधानी देहरादून में विधानसभा के बाहर कांग्रेस के धरना प्रदर्शन पर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह स्थिति “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” जैसी है।
विशेष सत्र और सियासी रणनीति
नारी वंदन अधिनियम संशोधन बिल को लेकर संसद में विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके बाद से भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। उत्तराखंड में भी 28 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है, जबकि कांग्रेस ने 23 अप्रैल को विधानसभा के बाहर धरना देकर महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की मांग उठाई।
त्रिवेंद्र का कांग्रेस पर हमला
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक ड्रामा करार देते हुए कहा कि जब सदन में बिल पेश किया गया, उसी समय विपक्ष ने बिना पूरी तरह पढ़े ही विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया महिलाओं के प्रति उसकी सोच को उजागर करता है।
‘विपक्ष ने नहीं दिया सहयोग’
त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से बिल पारित कराने में सहयोग की अपील की थी, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनके मुताबिक, यह बिल देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण में भागीदारी देने का एक बड़ा अवसर था, जिसे विपक्ष ने गंवा दिया।
परिसीमन और बढ़ता राजनीतिक विवाद
इस पूरे विवाद के पीछे परिसीमन का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है। प्रस्तावित परिसीमन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 करने की बात सामने आई है, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। विपक्षी दलों की असहमति के चलते यह मुद्दा और भी विवादित हो गया है।
2027 चुनाव से पहले सियासी गर्मी तेज
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस मुद्दे को लेकर आक्रामक नजर आ रही हैं। भाजपा जहां विपक्ष को बिल पास न होने का जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं कांग्रेस सरकार पर महिला आरक्षण लागू न करने का आरोप लगा रही है।
निष्कर्ष
महिला आरक्षण बिल को लेकर देहरादून से लेकर दिल्ली तक सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली मुद्दा—महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में उचित प्रतिनिधित्व—अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।


