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वीकेंड पर जाम से कराह उठी मसूरी, 31 किलोमीटर का सफर बना 6 घंटे की परीक्षा; पर्यटक और स्थानीय लोग परेशान

मसूरी | 30 मई 2026

उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले मसूरी में वीकेंड के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ ने यातायात व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। पर्यटन सीजन अपने चरम पर पहुंचते ही शहर एक बार फिर भीषण ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया। स्थिति इतनी गंभीर रही कि देहरादून से मसूरी की मात्र 31 किलोमीटर की दूरी तय करने में पर्यटकों को 5 से 6 घंटे तक का समय लग गया।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटकों को जाम के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों तक वाहनों में फंसे रहने से पर्यटकों का उत्साह निराशा में बदलता नजर आया।


प्रमुख मार्गों पर घंटों रेंगता रहा यातायात

शनिवार को मसूरी के लगभग सभी प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा। टिहरी बाईपास रोड, गांधी चौक, लाइब्रेरी चौक, पिक्चर पैलेस, माल रोड और कैम्पटी फॉल मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई स्थानों पर यातायात पूरी तरह ठप होने जैसी स्थिति बन गई, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते दिखाई दिए।

जाम के कारण पर्यटकों को होटल, पर्यटन स्थलों और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने में काफी विलंब हुआ। कई परिवारों ने शिकायत की कि उनका अधिकांश समय सड़क पर ही बीत गया।


दिल्ली से देहरादून आसान, लेकिन मसूरी पहुंचना बना चुनौती

पर्यटकों ने बताया कि दिल्ली से देहरादून तक लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा उन्होंने ढाई से तीन घंटे में पूरी कर ली, लेकिन देहरादून से मसूरी पहुंचने में ही पांच से छह घंटे का समय लग गया।

पर्यटकों का कहना है कि उन्होंने प्राकृतिक सुंदरता और ठंडे मौसम का आनंद लेने के लिए मसूरी का रुख किया था, लेकिन जाम ने उनकी पूरी यात्रा का अनुभव खराब कर दिया। कई पर्यटकों ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्यटन सीजन में भीड़ का अनुमान होने के बावजूद पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन नहीं किया गया।


ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

जाम में फंसे लोगों का आरोप है कि कई संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस और यातायात कर्मियों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी। कई स्थानों पर स्थानीय नागरिक और स्वयं पर्यटक ही वाहनों को व्यवस्थित करने की कोशिश करते नजर आए।

पर्यटकों का कहना है कि यदि प्रमुख चौराहों और जाम प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता तो स्थिति काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती थी।


टिहरी बाईपास रोड पर सबसे अधिक दबाव

सबसे गंभीर स्थिति टिहरी बाईपास रोड पर देखने को मिली, जहां धनोल्टी, कानाताल और नई टिहरी की ओर जाने वाले वाहनों का भारी दबाव बना रहा। सड़क की सीमित चौड़ाई के कारण थोड़ी सी रुकावट भी कई किलोमीटर लंबे जाम में बदल गई।

इसके अलावा गांधी चौक और आसपास के क्षेत्रों में सड़क किनारे खड़े वाहनों ने समस्या को और बढ़ा दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध पार्किंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है।


हर साल दोहराई जाती है समस्या

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि पर्यटन सीजन में ट्रैफिक जाम की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक मसूरी पहुंचते हैं और शहर की सीमित सड़कें वाहनों के दबाव को झेलने में असमर्थ साबित होती हैं।

व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण पर्यटकों का अनुभव प्रभावित होता है, जिसका असर स्थानीय पर्यटन उद्योग और कारोबार पर भी पड़ता है। लंबे समय से स्थायी समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आई है।


बहुस्तरीय पार्किंग और वैकल्पिक मार्गों की मांग

स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मसूरी में आधुनिक बहुस्तरीय पार्किंग सुविधाओं का निर्माण कराया जाए। साथ ही वैकल्पिक मार्ग विकसित कर पर्यटन सीजन के दौरान विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए ताकि वाहनों का दबाव विभिन्न मार्गों पर विभाजित किया जा सके।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पर्यटन सीजन के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।


निष्कर्ष

पर्यटन सीजन में रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे पर्यटक मसूरी की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन लगातार बढ़ता ट्रैफिक दबाव शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। वीकेंड पर लगे भीषण जाम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मसूरी को स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन, पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं और मजबूत यातायात नियंत्रण प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो पहाड़ों की रानी की खूबसूरती तक पहुंचना पर्यटकों के लिए और अधिक मुश्किल होता जाएगा।

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