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रिस्पना को फिर से मिलेगा जीवन! डीएम ने बनाई विशेष टास्क फोर्स, 15 किलोमीटर क्षेत्र का होगा ड्रोन और स्ट्रेचवार सर्वे

देहरादून, 27 जून 2026

देहरादून। कभी दून घाटी की जीवनरेखा और प्राकृतिक पहचान रही रिस्पना नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बार फिर व्यापक पहल शुरू कर दी है। वर्षों से प्रदूषण, अतिक्रमण और अव्यवस्थित शहरीकरण की मार झेल रही इस नदी को नया जीवन देने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के प्रभावी संचालन के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा, जो सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगी।


कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा जनआंदोलन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों का सहयोग मिलेगा, तभी नदी को उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जा सकेगा।


15 किलोमीटर क्षेत्र का होगा विस्तृत सर्वे

प्रशासन ने नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर लंबे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे कराया जाए। इस दौरान नदी में गिरने वाले सभी नालों, कूड़ा डंपिंग स्थलों और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान की जाएगी। इसके लिए ड्रोन सर्वे के साथ-साथ स्ट्रेचवार फील्ड सर्वे भी कराया जाएगा, ताकि प्रत्येक स्थान की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।

सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक चिन्हित स्थल के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सात दिनों के भीतर विस्तृत प्रस्ताव प्रशासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


विभिन्न विभागों के समन्वय के लिए बनेगी विशेष टास्क फोर्स

रिस्पना पुनर्जीवन अभियान में नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग सहित कई विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी कारण जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह को सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए हैं।

यह टास्क फोर्स विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की निगरानी करेगी, कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन करेगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को आगे बढ़ाने का काम करेगी।


जनभागीदारी से चलेगा अभियान

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि केवल सरकारी कार्रवाई से नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं बनाया जा सकता। जब तक लोग नदी में कूड़ा फेंकने की प्रवृत्ति नहीं छोड़ेंगे, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।

इसी उद्देश्य से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और पर्यावरण प्रेमियों को इस अभियान से जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि नदी संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।


घाट निर्माण, हरित पट्टी और सौंदर्यीकरण पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशासन की योजना केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं है। सिंचाई विभाग को नदी किनारे घाट विकसित करने, सार्वजनिक उपयोग के स्थान तैयार करने तथा सौंदर्यीकरण की विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं वन विभाग को नदी तटों पर बड़े स्तर पर पौधारोपण कर हरित पट्टी विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरित क्षेत्र बढ़ने से नदी की पारिस्थितिकी मजबूत होगी, भूजल संरक्षण में मदद मिलेगी और शहर का पर्यावरणीय संतुलन भी बेहतर होगा।


एलिवेटेड रोड परियोजना के साथ बनाया जाएगा संतुलन

लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के अंतर्गत नदी क्षेत्र में बनने वाले पिलर्स और अन्य संरचनाओं का तकनीकी खाका इस प्रकार तैयार किया जाए कि विकास कार्यों के साथ नदी संरक्षण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

प्रशासन का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित मॉडल तैयार करना है, जिससे भविष्य में दोनों आवश्यकताओं को समान रूप से पूरा किया जा सके।


दो चरणों में चलेगा रिस्पना पुनर्जीवन अभियान

जिलाधिकारी ने अभियान को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति के तहत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

अल्पकालिक योजना में नदी और उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल निस्तारण, गार्बेज प्वाइंट्स समाप्त करना, नदी में कचरा फेंकने पर प्रभावी रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाएगी।

दीर्घकालिक योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का निर्माण तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे रिस्पना को एक स्वच्छ, सुरक्षित और जीवंत नदी के रूप में पुनर्स्थापित किया जा सके।


निष्कर्ष

तेजी से फैलते शहरीकरण के बीच रिस्पना नदी का संरक्षण अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि देहरादून के भविष्य का भी महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। जिला प्रशासन की यह पहल नदी के अस्तित्व को बचाने के साथ-साथ शहर की प्राकृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि विभागीय समन्वय, वैज्ञानिक योजना और जनसहभागिता प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में रिस्पना नदी एक बार फिर दून घाटी की पहचान बन सकती है।

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