उत्तराखंड, 27 जून 2026
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को समय से पहले तेज कर दिया है। पार्टी ने उन चार विधानसभा सीटों पर विशेष रणनीति लागू कर दी है, जहां गठन के बाद से अब तक भाजपा कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। इन सीटों पर प्रदेश कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों की तैनाती कर संगठन ने बूथ स्तर तक माइक्रो मैनेजमेंट शुरू कर दिया है।
भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी करना नहीं, बल्कि उन सीटों पर भी जीत दर्ज करना है, जो अब तक पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
चार अभेद्य सीटों पर संगठन का विशेष फोकस
भाजपा ने इस बार चकराता, पिरान कलियर, मंगलौर और धारचूला विधानसभा सीटों को प्राथमिकता सूची में रखा है। इन चारों सीटों पर पार्टी आज तक विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकी है।
प्रदेश नेतृत्व ने प्रत्येक सीट की जिम्मेदारी प्रदेश कोर कमेटी के एक-एक वरिष्ठ सदस्य को सौंपी है। चुनाव तक वही इन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं के समन्वय, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति की निगरानी करेंगे।
बूथ स्तर तक शुरू हुआ माइक्रो मैनेजमेंट
भाजपा ने इन सीटों पर चुनावी अभियान को मजबूत करने के लिए माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल लागू किया है। इसके तहत बूथ समितियों, मंडल इकाइयों, मोर्चों, प्रकोष्ठों और ‘मन की बात’ कार्यक्रम से जुड़े समन्वयकों को एक मंच पर लाया जा रहा है।
संगठन का उद्देश्य प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर हर मतदाता तक सीधा संपर्क स्थापित करना है। पार्टी मुख्यालय से भी इन सभी विधानसभा क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और स्थानीय स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उम्मीदवार चयन के लिए भी चल रहा अंदरूनी सर्वे
संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ भाजपा संभावित उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी गंभीरता से काम कर रही है। पार्टी विभिन्न स्तरों पर आंतरिक सर्वे करा रही है, जिसमें स्थानीय जनाधार, सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक स्वीकार्यता और जीत की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जा रहा है।
भाजपा का मानना है कि मजबूत संगठन के साथ सही उम्मीदवार का चयन इन कठिन सीटों पर जीत की संभावना बढ़ा सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले की रणनीति पर भी नजर
पार्टी केवल कांग्रेस से सीधी टक्कर की रणनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती। भाजपा उन विधानसभा क्षेत्रों में भी विशेष नजर बनाए हुए है, जहां तीसरे दल या निर्दलीय उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं।
संगठन का आकलन है कि यदि चुनाव त्रिकोणीय होता है तो उसका लाभ भाजपा को मिल सकता है। इसी आधार पर स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों का लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
इन चार सीटों पर अब तक नहीं खुला भाजपा का खाता
चकराता (देहरादून)
वर्ष 2002 से लेकर 2022 तक हुए सभी पांच विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रीतम सिंह लगातार विजयी रहे हैं। भाजपा अब तक यहां जीत दर्ज नहीं कर पाई है।
पिरान कलियर (हरिद्वार)
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर वर्ष 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस के फुरकान अहमद लगातार विधायक चुने गए हैं। भाजपा को अब तक सफलता नहीं मिली।
मंगलौर (हरिद्वार)
इस सीट पर अलग-अलग चुनावों में बसपा और कांग्रेस का दबदबा रहा है। वर्ष 2024 के उपचुनाव के बाद भी सीट कांग्रेस के कब्जे में है, जबकि भाजपा अब तक जीत से दूर रही है।
धारचूला (पिथौरागढ़)
इस विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2002 और 2007 में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि 2012, 2017 और 2022 में कांग्रेस के हरीश धामी ने जीत दर्ज की। 2014 के उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
इन तीन सीटों पर भी जीत की तलाश
भाजपा ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है, जहां उसे सीमित सफलता मिली है।
यमुनोत्री (उत्तरकाशी) में केवल 2017 में भाजपा को जीत मिली थी, जबकि अन्य चुनावों में यूकेडी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
भगवानपुर (हरिद्वार) में 2002 के बाद भाजपा दोबारा जीत दर्ज नहीं कर सकी। यहां बसपा और कांग्रेस का प्रभाव बना रहा है।
हल्द्वानी (नैनीताल) में भी 2007 के बाद से लगातार कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा इस बार इस सीट पर भी मजबूत रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।
प्रदेश नेतृत्व ने जताया जीत का भरोसा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि संगठन ने चुनौतीपूर्ण सीटों के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। सभी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का गहन अध्ययन किया जा रहा है। जहां मुकाबला त्रिकोणीय बनने की संभावना होगी, वहां भाजपा अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश करेगी।
वहीं प्रदेश महामंत्री कुंदन सिंह परिहार ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में इन सीटों पर भाजपा के प्रति सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद संगठन ने अलग रणनीति बनाकर काम शुरू कर दिया है और आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर जीत हासिल करना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने समय से पहले चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। जिन चार सीटों पर पार्टी अब तक जीत दर्ज नहीं कर सकी, वहां कोर कमेटी के वरिष्ठ नेताओं की तैनाती और बूथ स्तर तक माइक्रो मैनेजमेंट इस बात का संकेत है कि संगठन कोई भी राजनीतिक जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। अब देखना होगा कि वर्षों से भाजपा के लिए चुनौती बनी इन विधानसभा सीटों पर यह नई रणनीति आगामी चुनाव में कितना असर दिखा पाती है।


