हरिद्वार | 24 अप्रैल 2026
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा सप्तमी का पर्व गुरुवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहित समाज ने अपने परिवारों के साथ मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की, वहीं शहर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई।
हर की पैड़ी पर हुआ विशेष गंगा पूजन
गंगा सप्तमी को मां गंगा के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर हर की पैड़ी पर तीर्थ पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से गंगा पूजन किया गया।
पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, पंचामृत, फल-फूल और छप्पन भोग अर्पित किए। मां गंगा के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
राजा भगीरथ की तपस्या से जुड़ा है इतिहास
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। यह दिन राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से भी जुड़ा है, जिन्होंने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए मां गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लिया था।
कथाओं के अनुसार, गंगा के प्रचंड वेग से जह्नु ऋषि का आश्रम प्रभावित हुआ, जिसके बाद उन्होंने गंगा को अपने कर्ण से पुनः प्रकट किया। इसी कारण मां गंगा को ‘जाह्नवी’ नाम से भी जाना जाता है।
भव्य शोभायात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
गंगा सप्तमी के अवसर पर कुशावर्त घाट से गंगा जन्मोत्सव मंडल तीर्थ पुरोहित समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा में सजी झांकियां, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र रहे। शहर के प्रमुख बाजारों से गुजरते हुए यात्रा का जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।
श्रद्धालुओं और व्यापारियों ने मार्ग में खड़े होकर शोभायात्रा का अभिनंदन किया और मां गंगा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
निष्कर्ष
गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर हरिद्वार में आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां गंगा के प्रति श्रद्धा और धार्मिक मान्यताओं के साथ यह पर्व न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय जीवन और आजीविका से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।


